देश में भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों के आंकड़ों में पिछले पांच वर्षों के दौरान बड़ा बदलाव देखने को मिला है। केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 और 2022 में गृह मंत्रालय के खिलाफ सबसे ज्यादा शिकायतें दर्ज हुई थीं। 2021 में यह संख्या 37,670 और 2022 में बढ़कर 46,643 हो गई थी। इसके मुकाबले रेलवे के खिलाफ क्रमशः 11,003 और 10,580 शिकायतें आई थीं। हालांकि, 2023 से तस्वीर पूरी तरह बदल गई। उस साल गृह मंत्रालय और उससे जुड़े संगठनों (दिल्ली पुलिस को छोड़कर) के खिलाफ शिकायतें घटकर 2,309 रह गईं, जबकि रेलवे 10,447 शिकायतों के साथ सबसे ऊपर पहुंच गया। बैंकों के खिलाफ 7,004 शिकायतें दर्ज हुईं। 2024 में गृह मंत्रालय की शिकायतें और घटकर 1,102 रह गईं, वहीं रेलवे के खिलाफ 8,177 और बैंकों के खिलाफ 5,966 शिकायतें आईं।
2025 में बैंकों के खिलाफ 9,933 शिकायतों के साथ वे सबसे ऊपर रहे, जबकि रेलवे 9,381 शिकायतों के साथ दूसरे स्थान पर रहा। गृह मंत्रालय के खिलाफ 2,036 शिकायतें दर्ज हुईं। दिल्ली पुलिस के खिलाफ अलग से 2,633 शिकायतें आईं। CVC के आंकड़ों में अचानक आई इस गिरावट को सीधे तौर पर भ्रष्टाचार में कमी नहीं माना जा सकता। इसकी एक वजह अलग-अलग वर्षों में मंत्रालयों और उनसे जुड़े संगठनों की रिपोर्टिंग और कवरेज में बदलाव भी है।
बैंक और रेलवे आम लोगों से बड़े पैमाने पर जुड़े हैं। बैंकिंग सेवाओं, कर्ज, लेन-देन से लेकर रेलवे में टिकट, भर्ती, ठेके और निर्माण तक रोजाना करोड़ों लोगों का संपर्क इन संस्थानों से होता है। इसलिए यहां शिकायतों की संख्या अधिक होना स्वाभाविक रूप से संस्थान के आकार और संपर्क के दायरे से भी जुड़ा है। 2025 में CVC को 34,153 नई शिकायतें मिलीं। इनमें से सिर्फ 248 मामलों को CVO या CBI के पास जांच के लिए भेजा गया। इससे साफ है कि शिकायतों की संख्या को भ्रष्टाचार का सीधा पैमाना नहीं माना जा सकता।


