केन्या के राष्ट्रपति विलियम रुटो ने टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा केमिकल्स को देश में अपना कामकाज बंद करने का निर्देश दिया है। कंपनी दक्षिणी केन्या के काजियाडो इलाके में लेक मगादी से कच्चा माल निकालकर सोडा ऐश का उत्पादन करती है। राष्ट्रपति के इस फैसले के बाद कारोबारी जगत में हलचल तेज हो गई है। काजियाडो के दौरे के दौरान राष्ट्रपति रुटो ने टाटा केमिकल्स की लंबे समय से चली आ रही मौजूदगी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कंपनी को करीब 100 वर्षों से केन्या में काम करने का अवसर मिला, लेकिन स्थानीय लोगों और क्षेत्र को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिला। रुटो के मुताबिक, इतने लंबे समय के बावजूद कंपनी ने इलाके में कोई बड़ी मैन्युफैक्चरिंग फैक्ट्री स्थापित नहीं की और न ही पर्याप्त नए निवेश और रोजगार के अवसर पैदा किए।
राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार अब नए निवेशकों को आकर्षित करेगी। उनका लक्ष्य काजियाडो में कांच और केमिकल निर्माण से जुड़ी नई फैक्ट्रियां स्थापित करना है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि टाटा केमिकल्स के पास मौजूद खनन अधिकार नए निवेशकों को दिए जा सकते हैं। हालांकि, टाटा केमिकल्स ने अपनी ओर से सफाई देते हुए कहा है कि उसने 11 अगस्त 2026 को केन्याई सरकार के समक्ष आवश्यक दस्तावेज और विस्तृत कम्प्लायंस रिपोर्ट जमा कर दी थी। कंपनी का कहना है कि वह संबंधित नियमों और सरकारी प्रक्रियाओं का पालन कर रही है। इस बीच विपक्षी डेमोक्रेसी फॉर द सिटिजन्स पार्टी ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि टाटा केमिकल्स को हटाने के पीछे राष्ट्रपति रुटो के कारोबारी हित भी हो सकते हैं। पार्टी ने दावा किया है कि मगादी क्षेत्र में लिथियम के संभावित भंडार और तेल संसाधनों की संभावनाएं मौजूद हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।


