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संसद में गतिरोध बरकरार, FCRA और परिसीमन विधेयक पर बढ़ी सियासी खींचतान

संसद के मानसून सत्र का तीसरा सप्ताह भी सरकार और विपक्ष के बीच जारी टकराव के साथ समाप्त हो गया। हालांकि सरकार कई अहम विधेयकों को पारित कराने में सफल रही है, लेकिन अब सबसे अधिक ध्यान दो महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर है-परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक तथा विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) संशोधन विधेयक। इन दोनों पर फैसला कराने के लिए सरकार के पास अब सीमित समय बचा है। इसी वजह से सत्ता पक्ष ने अपने सभी सांसदों को अगले सप्ताह सदन में मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं, जबकि कांग्रेस ने भी अपने सांसदों के लिए तीन दिन का व्हिप जारी किया है।

सूत्रों के मुताबिक, एफसीआरए और परिसीमन विधेयक को लेकर सरकार और कांग्रेस के बीच सहमति नहीं बन पा रही है। सरकार का दावा है कि कांग्रेस पर कुछ ईसाई संगठनों का दबाव है, जो एफसीआरए संशोधन का विरोध कर रहे हैं। वहीं परिसीमन के मुद्दे पर भी कांग्रेस के भीतर अलग-अलग राय होने की बात कही जा रही है। सरकार को उम्मीद है कि डीएमके परिसीमन विधेयक का समर्थन कर सकती है। यदि ऐसा होता है तो दक्षिण भारत में इस मुद्दे पर विपक्ष की रणनीति कमजोर पड़ सकती है। बताया जा रहा है कि डीएमके ने कुछ सुझाव सरकार के सामने रखे हैं, जिनमें लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और परिसीमन को जनगणना से अलग करने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।

इधर तमिलनाडु में इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री विजय ने सर्वदलीय बैठक बुलाई है, हालांकि माना जा रहा है कि डीएमके या तो इससे दूरी बनाए रखेगी या अपना अंतिम रुख स्पष्ट नहीं करेगी। संसदीय गतिरोध खत्म करने के लिए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी से कई दौर की बातचीत की है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकल सका है। कांग्रेस गृह मंत्री अमित शाह से दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सदन में बयान देने की मांग कर रही है, जबकि सरकार का कहना है कि एफसीआरए विधेयक पर जवाब भी अमित शाह ही देंगे और विपक्ष को इस मुद्दे पर अड़ने से बचना चाहिए।

विपक्ष का सुझाव है कि यदि सरकार एफसीआरए विधेयक में संशोधन करे या उसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजे, तो परिसीमन विधेयक पर सहमति का रास्ता निकल सकता है। हालांकि सरकार ने एफसीआरए में किसी भी बदलाव की संभावना से साफ इनकार किया है। अब सबकी नजर सरकार की आगामी रणनीति पर है। सूत्रों के अनुसार, एफसीआरए विधेयक मौजूदा सत्र में पेश किया जा सकता है, जबकि परिसीमन विधेयक के लिए विशेष सत्र बुलाने का विकल्प भी विचाराधीन है।