भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने रॉकेट और सैटेलाइट में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण उपकरणों के स्वदेशी विकास और निर्माण की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। इस उद्देश्य से इसरो के विभिन्न केंद्रों ने तकनीकी उपकरणों और प्रणालियों से जुड़े कई टेंडर जारी किए हैं। इस पहल का लक्ष्य अंतरिक्ष अभियानों में इस्तेमाल होने वाले जरूरी घटकों के लिए घरेलू तकनीकी क्षमता को मजबूत करना है।
विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र ने रॉड एंड बेयरिंग के स्वदेशी विकास के लिए टेंडर जारी किया है। इसमें विदेशी उपकरण निर्माताओं और उनके एजेंटों को बोली लगाने की अनुमति नहीं दी गई है। इससे घरेलू निर्माण क्षमता को प्राथमिकता देने का संकेत मिलता है। यूआर राव सैटेलाइट सेंटर ने वाइब्रेशन टेस्ट फिक्स्चर के लिए टेंडर मांगा है। इस उपकरण के जरिए अंतरिक्ष मिशनों में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों और संरचनाओं की कंपन संबंधी जांच की जाती है।
वहीं, सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र ने एचपीएस3 एक्सियल थ्रस्ट मेजरमेंट सिस्टम के लिए टेंडर जारी किया है। यह रॉकेट से जुड़े परीक्षणों में थ्रस्ट मापने के काम आता है। इसके अलावा एक्स-बैंड सिमुलेशन अप-कन्वर्टर और एक्साइटर जैसे संचार उपकरणों के लिए भी टेंडर जारी किए गए हैं। यूआरएससी ने फ्लाइट सोलर पैनल के फैब्रिकेशन और टेस्टिंग के लिए भी टेंडर आमंत्रित किए हैं। ये पैनल अंतरिक्ष में सैटेलाइटों को ऊर्जा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन प्रयासों से रॉकेट और सैटेलाइट के जरूरी हिस्सों के विकास, निर्माण और परीक्षण में भारत की घरेलू क्षमता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।


