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डॉग ट्रैफिकिंग पर बनी फिल्म ‘Oh My Dog’ 31 जुलाई को होगी रिलीज, बेजुबान जानवरों के प्रति जगाएगी संवेदनशीलता

हिंदी सिनेमा में सामाजिक मुद्दों पर आधारित फिल्मों की श्रृंखला में अब एक और नई फिल्म ‘ओह माय डॉग’ जुड़ने जा रही है, जो 31 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। यह फिल्म डॉग ट्रैफिकिंग यानी कुत्तों की अवैध तस्करी जैसे गंभीर और अनछुए विषय को बड़े पर्दे पर प्रस्तुत करेगी। फिल्म का मुख्य उद्देश्य केवल मनोरंजन करना नहीं, बल्कि बेजुबान जानवरों के अधिकारों और उनके प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना है। मेकर्स के अनुसार, यह कहानी एक बच्चे और उसके पालतू कुत्ते के भावनात्मक रिश्ते के माध्यम से एक मजबूत संदेश देगी।

फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी अनूठी प्रस्तुति और इसमें असली जानवरों का इस्तेमाल है। शूटिंग के दौरान कहानी को वास्तविक और प्रभावशाली बनाने के लिए करीब 250 असली कुत्तों को शामिल किया गया। फिल्म में ब्रूनो और ऑस्कर नाम के दो डॉगी मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे, जिनका चयन देशभर में बड़े पैमाने पर हुए ऑडिशन के बाद किया गया था। मेकर्स इन्हें ही फिल्म का वास्तविक नायक मानते हैं, क्योंकि पूरी कहानी इन्हीं दोनों पात्रों के इर्द-गिर्द आगे बढ़ती है।

प्रसिद्ध अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने भी इस फिल्म से जुड़कर इसे खास बना दिया है। फिल्म में उनकी भूमिका सीमित समय के लिए है, लेकिन कहानी के प्रभाव से जुड़कर उन्होंने इस प्रोजेक्ट के लिए कोई पारिश्रमिक नहीं लिया। उनके मुताबिक, कुत्तों का निस्वार्थ प्रेम हमेशा से उन्हें प्रभावित करता है और यही भावना उन्हें इंसान और जानवर के बीच के विश्वास को दर्शाने वाली इस कहानी से जोड़ने का मुख्य कारण बनी। निर्देशन की कमान अमित राय ने संभाली है, जिन्होंने इससे पहले भी कई सामाजिक विषयों पर आधारित चर्चित फिल्मों का निर्देशन किया है। इस फिल्म की कहानी डॉग ट्रैफिकिंग के उस अंधेरे पहलू को बेनकाब करती है, जहां पालतू जानवरों की अवैध तस्करी कर उन्हें गलत हाथों में सौंपा जाता है।

फिल्म यह दिखाती है कि कैसे एक मासूम बच्चे का अपने पालतू साथी के प्रति सच्चा प्रेम एक बड़े अवैध नेटवर्क का पर्दाफाश करने का जरिया बन जाता है। फिल्म के निर्माण के दौरान वास्तविक कुत्तों के साथ शूटिंग करना तकनीकी और प्रबंधन के लिहाज से बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। इसके लिए विशेष प्रशिक्षण, पशु विशेषज्ञों की निरंतर निगरानी और कड़े सुरक्षा मानकों का पालन किया गया ताकि किसी भी जानवर को कोई असुविधा न हो। निर्माताओं का मानना है कि यह फिल्म सिर्फ पशु प्रेमियों के लिए नहीं, बल्कि हर उस दर्शक के लिए है जो करुणा और मानवीय मूल्यों में विश्वास रखता है।