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होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता घटाने में जुटे खाड़ी देश, वैकल्पिक तेल मार्गों पर तेज़ हुआ निवेश

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर लगातार हमलों की घटनाओं के बीच खाड़ी देशों ने तेल और गैस निर्यात के लिए वैकल्पिक मार्ग विकसित करने की दिशा में तेजी से काम शुरू कर दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यही कारण है कि कई देश अब अपने ऊर्जा निर्यात को सुरक्षित बनाने के लिए नए पाइपलाइन नेटवर्क और बुनियादी ढांचे में निवेश कर रहे हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। दुनिया के कुल कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा और भारत के लिए आयात होने वाली तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का बड़ा भाग इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में किसी भी तरह की रुकावट का असर वैश्विक तेल बाजार और ऊर्जा कीमतों पर पड़ सकता है।

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और इराक ने ऐसे बड़े पाइपलाइन प्रोजेक्ट शुरू किए हैं, जिनके जरिए बिना होर्मुज जलडमरूमध्य का इस्तेमाल किए कच्चे तेल का निर्यात किया जा सकेगा। वहीं, सऊदी अरब भी अपने पाइपलाइन नेटवर्क के विस्तार की संभावनाओं पर काम कर रहा है। निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स के अनुमान के अनुसार, वर्ष 2027 के अंत तक इतनी अतिरिक्त पाइपलाइन क्षमता तैयार हो सकती है कि खाड़ी क्षेत्र के युद्ध-पूर्व तेल निर्यात का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा वैकल्पिक मार्गों से भेजा जा सके।

यूएई का वेस्ट-ईस्ट पाइपलाइन प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसका आधे से अधिक निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। करीब 252 मील लंबी इस परियोजना को 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके शुरू होने के बाद यूएई की भूमि आधारित कच्चे तेल के निर्यात की क्षमता बढ़कर 36 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इन परियोजनाओं से भविष्य में ऊर्जा आपूर्ति अधिक सुरक्षित होगी और होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी।