नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं को लेकर विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे इस आंदोलन ने अब नया मोड़ ले लिया है। लद्दाख के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने रविवार से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी, जिसके बाद प्रदर्शन स्थल पर छात्रों, युवाओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों की भीड़ बढ़ने लगी। कई किसान संगठनों ने भी इस आंदोलन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है।
भूख हड़ताल शुरू करने से पहले सोनम वांगचुक और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद दोनों जंतर-मंतर पहुंचे, जहां वांगचुक ने आमरण अनशन शुरू किया। अभिजीत दीपके ने कहा कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री अपने पद से इस्तीफा नहीं देते और छात्रों की मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
इस बीच आंदोलन के दौरान वांगचुक की पिछली गिरफ्तारी का मुद्दा भी एक बार फिर चर्चा में आ गया है। पिछले वर्ष लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर हुए आंदोलन के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया था और बाद में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में रखा गया था।
गौरतलब है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने हाल ही में एक बयान में आरोप लगाया था कि कुछ लोग शिक्षा व्यवस्था को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं। इस पर CJP ने पलटवार करते हुए कहा कि आंदोलन में शामिल छात्र और नागरिक लोकतांत्रिक तरीके से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, उन्हें देशविरोधी या असामाजिक तत्व बताना उचित नहीं है। संगठन का कहना है कि NEET पेपर लीक जैसे गंभीर मामलों पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए।


