राम मंदिर अयोध्या में चढ़ावे की गिनती से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले में प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। दान की गणना प्रक्रिया में लगे करीब 40 कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। उनकी जगह बैंक और ट्रस्ट की ओर से नए गणना कर्मियों की नियुक्ति की गई है, ताकि चढ़ावे की गिनती में पारदर्शिता और सख्त निगरानी सुनिश्चित की जा सके।
इस पूरे मामले की जांच उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) कर रही है। टीम ने छह दिन तक विस्तृत जांच के बाद लखनऊ में अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार कर ली है, जिसे आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपे जाने की संभावना है। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
SIT ने जांच के दौरान दान से जुड़े रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, कैश काउंटिंग प्रक्रिया और गहनों सहित अन्य कीमती वस्तुओं के दावों की गहन जांच की। इस दौरान ट्रस्ट से जुड़े अधिकारी, पुजारी, बैंक प्रतिनिधि और कैश हैंडलिंग स्टाफ सहित 100 से अधिक लोगों से पूछताछ की गई।
जांच के दायरे में आए सभी लोगों को निर्देश दिया गया है कि वे जांच पूरी होने तक अयोध्या न छोड़ें। ट्रस्ट के अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ और अन्य जांच प्रक्रियाओं का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा जा रहा है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
सूत्रों के मुताबिक, यह मामला केवल फंड की गड़बड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि मंदिर निर्माण के लिए की गई खरीदारी और सामग्री की आपूर्ति की भी जांच की जा रही है। कुछ जानकारी यह भी सामने आई है कि 2025 की शुरुआत में प्रयागराज महाकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के समय दान की मात्रा में असामान्य बढ़ोतरी दर्ज की गई थी, जिससे जांच को और विस्तार मिला। फिलहाल SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद इस मामले में आगे की कार्रवाई और सख्ती की उम्मीद जताई जा रही है।









