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टीएमसी में बढ़ी अंदरूनी कलह, ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी खेमों के बीच शक्ति प्रदर्शन तेज

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर राजनीतिक खींचतान खुलकर सामने आ गई है। पार्टी के एक धड़े का नेतृत्व कर रहे ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया है कि टीएमसी के 80 में से 60 विधायक उनके साथ हैं। हाल ही में उन्हें विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का दर्जा मिला है। ऋतब्रत ने अपने गुट को “असली टीएमसी” बताते हुए ममता बनर्जी को पार्टी का मुख्य सलाहकार बनाने का प्रस्ताव भी रखा है।

दूसरी ओर, ममता बनर्जी का खेमा इस चुनौती का जवाब देने की रणनीति तैयार कर रहा है। पार्टी विधानसभा अध्यक्ष द्वारा ऋतब्रत को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने के फैसले को अदालत में चुनौती देने की तैयारी में है। साथ ही नाराज विधायकों को वापस अपने पक्ष में लाने के प्रयास भी तेज कर दिए गए हैं।

टीएमसी के वरिष्ठ नेता शोभन देब चटर्जी का दावा है कि ऋतब्रत खेमे में गए कई विधायक अब दोबारा ममता बनर्जी के साथ जुड़ना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि विरोधी गुट द्वारा विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे गए समर्थन पत्र की सत्यता की जांच होनी चाहिए। उनके अनुसार कई विधायकों के हस्ताक्षरों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

वहीं, ऋतब्रत गुट के भीतर भी मतभेद दिखाई देने लगे हैं। कुछ विधायक ममता बनर्जी को केवल सलाहकार की भूमिका देने के प्रस्ताव से सहमत नहीं हैं। पंचाला से विधायक गुलशन मलिक ने साफ कहा कि ममता बनर्जी ही उनकी सर्वोच्च नेता हैं और उनके नेतृत्व पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

इस बीच, कालीघाट स्थित आवास पर ममता बनर्जी ने अपने करीबी नेताओं के साथ बैठक की। पार्टी ने अभिषेक बनर्जी के प्रति भी समर्थन दोहराया। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि टीएमसी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है, जबकि पार्टी का आरोप है कि भाजपा इस असंतोष को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति और अधिक दिलचस्प हो सकती है।