समीक्षा अधिकारी (RO) और सहायक समीक्षा अधिकारी (ARO) परीक्षा-2023 की भर्ती प्रक्रिया पर उठे सवालों के बीच Uttar Pradesh Public Service Commission अब हाईकोर्ट में अपना विस्तृत पक्ष रखने की तैयारी कर रहा है। आयोग ने दावा किया है कि पूरी चयन प्रक्रिया पारदर्शी, नियमबद्ध और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप रही है। आयोग के अनुसार 5 अप्रैल 2026 को जारी अंतिम परिणाम में कुल 419 अभ्यर्थियों का चयन हुआ, जिनमें 176 उम्मीदवार ओबीसी वर्ग से हैं। यानी चयनित अभ्यर्थियों में ओबीसी की हिस्सेदारी 42 प्रतिशत रही, जबकि सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व 28.16 प्रतिशत दर्ज किया गया।
आयोग के सचिव Girijesh Tyagi ने स्पष्ट किया कि प्रारंभिक परीक्षा केवल स्क्रीनिंग और उपयुक्तता तय करने के लिए होती है, जिसके अंक अंतिम मेरिट में नहीं जोड़े जाते। अंतिम चयन मुख्य परीक्षा, टंकण परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर किया जाता है। ऐसे में आरक्षण का वास्तविक प्रभाव अंतिम चयन सूची में दिखाई देता है। आयोग का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में 1994 और 1986 की नियमावलियों के साथ विज्ञापन की सभी शर्तों का पूरी तरह पालन किया गया है। दरअसल, कुछ अभ्यर्थियों ने आरक्षण और माइग्रेशन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। इस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने फिलहाल चयनित अभ्यर्थियों की जॉइनिंग पर अंतरिम रोक लगा दी है। हालांकि आयोग का कहना है कि वह अदालत में कानूनी और तथ्यात्मक आधार पर पूरी प्रक्रिया का बचाव करेगा।
UPPSC अब Haryana Public Service Commission से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम टिप्पणियों और आदेशों का भी अध्ययन कर रहा है। आयोग का मानना है कि शीर्ष अदालत पहले ही यह संकेत दे चुकी है कि प्रारंभिक परीक्षा स्तर पर आरक्षण लागू करने का मुद्दा विस्तृत कानूनी परीक्षण का विषय है। इसी आधार पर आयोग हाईकोर्ट में यह दलील देगा कि चयन प्रक्रिया संवैधानिक प्रावधानों और स्थापित कानूनी सिद्धांतों के अनुरूप पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न कराई गई है।









