लखनऊ में पकड़े गए संदिग्ध आतंकियों के मामले में जांच एजेंसियों ने कार्रवाई तेज कर दी है। उत्तर प्रदेश एटीएस को बड़ी सफलता मिली है, जब अदालत ने चार आरोपियों—साकिब उर्फ डेविल, अरबाब, लोकेश और विकास गहलावत—को चार दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया। यह रिमांड 30 अप्रैल से प्रभावी है, जिसके दौरान उनसे गहन पूछताछ की जा रही है। जांच में सामने आया है कि इन आरोपियों पर पाकिस्तान से जुड़े हैंडलर्स के निर्देश पर लखनऊ समेत कई स्थानों पर आगजनी, रेलवे सिग्नल सिस्टम को नुकसान पहुंचाने और दहशत फैलाने की साजिश रचने का आरोप है। मुख्य आरोपी साकिब, जो मेरठ का रहने वाला है, कथित तौर पर एन्क्रिप्टेड ऐप्स और सोशल मीडिया के माध्यम से विदेशी संपर्क में था और उसने अन्य साथियों को भी इस नेटवर्क में शामिल किया।
सूत्रों के अनुसार, इस मॉड्यूल ने रेलवे और संवेदनशील स्थानों की रेकी कर उनकी लोकेशन साझा की थी। जांच में यह भी सामने आया कि उन्हें आगजनी जैसी घटनाओं के लिए आर्थिक प्रलोभन देने की बात कही गई थी। इसी तरह नोएडा में पकड़े गए दो अन्य संदिग्धों की भी जांच जारी है, जिन पर धमकी भरे कॉल और डिजिटल माध्यमों से नेटवर्क फैलाने का आरोप है। इनके मोबाइल से कई रिकॉर्डिंग और विदेशी संपर्कों के संकेत मिले हैं। एटीएस अब इस पूरे नेटवर्क की फंडिंग, भर्ती प्रक्रिया और ऑनलाइन रेडिकलाइजेशन की जांच कर रही है, साथ ही संभावित स्लीपर सेल की तलाश भी जारी है। अधिकारियों ने इसे राज्य की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कार्रवाई बताया है।









