देश में महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में ऐसे मामलों की संख्या बढ़कर 6,76,019 तक पहुंच गई है, जबकि हर दिन औसतन 370 शिकायतें दर्ज हो रही हैं। सबसे ज्यादा मामले फर्जी प्रोफाइल, अश्लील संदेश और पहचान चोरी से जुड़े हैं, जिनकी संख्या 4,89,790 है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब महिलाएं जागरूक होकर खुलकर शिकायत दर्ज करा रही हैं, जिससे मामलों में वृद्धि दिखाई दे रही है।
साइबर बदमाशी, स्टॉकिंग और अश्लील संदेशों के मामलों में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 2021 में जहां 21,589 मामले सामने आए थे, वहीं 2025 तक यह संख्या बढ़कर 45,832 हो गई। इसी तरह फर्जी अकाउंट से जुड़े अपराध 2021 के 15,843 मामलों से बढ़कर 2025 में 46,784 तक पहुंच गए। प्रोफाइल हैकिंग और पहचान चोरी के मामलों में भी लगातार इजाफा हुआ है, जो डिजिटल सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करता है।
रिपोर्ट में ई-मेल फिशिंग, ऑनलाइन नौकरी धोखाधड़ी और वैवाहिक ठगी जैसे अपराध भी तेजी से बढ़ते दिखे हैं। ई-मेल फिशिंग के 7,682 और ऑनलाइन जॉब फ्रॉड के 53,143 मामले दर्ज किए गए, जबकि 4,680 मामले ऑनलाइन मैट्रिमोनियल फ्रॉड से जुड़े हैं। इसके अलावा फर्जी अकाउंट के जरिए धोखाधड़ी के 94,036 और गैरकानूनी कंटेंट से जुड़े 22,854 मामले सामने आए हैं।
इन बढ़ते अपराधों से निपटने के लिए भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र की स्थापना की गई है। इसके तहत शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए तंत्र को मजबूत किया गया है और पुलिस व न्यायिक अधिकारियों को साइबर जांच और फोरेंसिक से जुड़ा प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सरकार ने साइबर धोखाधड़ी पर नियंत्रण के लिए आधुनिक तंत्र विकसित किए हैं, ताकि महिलाओं की ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।









