Delhi

दिल्ली में बिजली महंगी होने की आशंका, 30,000 करोड़ बकाया विवाद से बढ़ा संकट

दिल्ली में आने वाले समय में बिजली उपभोक्ताओं को झटका लग सकता है, क्योंकि बिजली दरों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। अपीलीय न्यायाधिकरण (APTEL) ने दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC) की वह याचिका खारिज कर दी है, जिसमें डिस्कॉम कंपनियों पर बकाया करीब 30,000 करोड़ रुपये के भुगतान के लिए अतिरिक्त समय देने की मांग की गई थी।

DERC ने तर्क दिया था कि यदि भुगतान की समयसीमा बढ़ाई जाती है तो उपभोक्ताओं पर अचानक बढ़ने वाला वित्तीय दबाव कम किया जा सकता है और टैरिफ स्थिर रखा जा सकता है। लेकिन न्यायाधिकरण ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और मौजूदा भुगतान योजना के अनुसार ही बकाया चुकाने के निर्देश दिए। इस फैसले के बाद अब आशंका बढ़ गई है कि बिजली वितरण कंपनियां यह वित्तीय बोझ उपभोक्ताओं पर डाल सकती हैं, जिससे दिल्ली में बिजली बिल बढ़ सकते हैं।

यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के पहले के निर्देशों के बाद आया है, जिसमें सभी राज्यों को 2024 से पुराने बकाये का निपटारा शुरू कर 2028 तक पूरा करने का आदेश दिया गया था। अदालत ने जरूरत पड़ने पर टैरिफ बढ़ाने की अनुमति भी दी थी। दिल्ली की स्थिति अन्य राज्यों से अलग है, क्योंकि यहां निजी कंपनियां बिजली वितरण का कार्य संभालती हैं और सरकार पर सब्सिडी का बड़ा दबाव रहता है। ऐसे में या तो बिजली दरें बढ़ेंगी या सरकार को अतिरिक्त सब्सिडी देनी होगी, वरना उपभोक्ताओं पर सीधा असर पड़ सकता है।