भारत अपनी समुद्री सुरक्षा को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। 21 अप्रैल 2026 से रक्षा मंत्री Rajnath Singh का तीन दिवसीय Germany दौरा इस लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। इस दौरान भारत और जर्मनी के बीच करीब 80 हजार करोड़ रुपये की मेगा रक्षा डील पर सहमति बन सकती है, जो भारतीय नौसेना की ताकत को कई गुना बढ़ा देगी।
यह प्रस्तावित समझौता भारतीय नौसेना के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट-75I के तहत है। इस परियोजना का उद्देश्य छह अत्याधुनिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों का निर्माण करना है, जिनमें नवीनतम तकनीक का इस्तेमाल होगा। जर्मनी की प्रमुख रक्षा कंपनी ThyssenKrupp Marine Systems इस प्रोजेक्ट में तकनीकी सहयोग दे सकती है।
प्रोजेक्ट-75I की सबसे खास विशेषता एयर इंडिपेंडेंट प्रॉपल्शन (AIP) तकनीक है, जो पनडुब्बियों को लंबे समय तक पानी के भीतर रहने में सक्षम बनाती है। जहां मौजूदा पनडुब्बियों को बार-बार सतह पर आना पड़ता है, वहीं नई पनडुब्बियां लगभग एक महीने तक बिना सतह पर आए मिशन पूरा कर सकती हैं। इससे दुश्मन की नजरों से बचते हुए ऑपरेशन करना आसान होगा।
इन पनडुब्बियों को अत्याधुनिक हथियारों से लैस किया जाएगा, जिनमें BrahMos missile जैसी घातक मिसाइलें शामिल होंगी। इससे समुद्र में दुश्मन के जहाजों और तटीय ठिकानों पर सटीक हमला संभव होगा। वैश्विक स्तर पर बढ़ते समुद्री तनाव और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा को देखते हुए यह डील भारत की समुद्री ताकत को हिंद महासागर, प्रशांत महासागर और अरब सागर में और अधिक प्रभावशाली बना सकती है।









