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दिल्ली दौरे से बदले समीकरण, बांग्लादेशी विदेश मंत्री की मुलाकातों पर सबकी नजरें

राजनीति में स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होते, बल्कि हित सबसे अहम होते हैं—इसी बात को ताज़ा घटनाक्रम एक बार फिर साबित करता नजर आ रहा है। बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलील उर रहमान का नई दिल्ली दौरा कई मायनों में खास माना जा रहा है। 7 अप्रैल को उनका भारत पहुंचना केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं, बल्कि दोनों देशों के रिश्तों में नए अध्याय की शुरुआत का संकेत हो सकता है।

यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद यह पहला उच्च-स्तरीय संपर्क है। अब वहां बीएनपी की सरकार है और तारिक रहमान प्रधानमंत्री हैं। इससे पहले मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के दौरान भारत-बांग्लादेश संबंधों में कुछ तनाव देखने को मिला था। दिल्ली में उनकी मुलाकात एस. जयशंकर के साथ हैदराबाद हाउस में होगी। इसके अलावा पीयूष गोयल, हरदीप सिंह पुरी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी बातचीत संभव है।

डोभाल की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि चर्चा केवल कूटनीतिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सुरक्षा और रणनीतिक पहलुओं पर भी फोकस होगा। इस दौरे के दौरान वीज़ा सेवाओं की बहाली, ऊर्जा सहयोग, सीमा प्रबंधन, तीस्ता नदी जल बंटवारा, व्यापार को आसान बनाना और मेडिकल टूरिज्म जैसे अहम मुद्दों पर बातचीत हो सकती है। खासकर वीज़ा सेवाओं की बहाली बांग्लादेश के लिए प्राथमिकता है, क्योंकि भारत लंबे समय से वहां के मरीजों के लिए प्रमुख चिकित्सा केंद्र रहा है।