मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। Donald Trump ने हाल ही में दावा किया था कि Iran के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है, लेकिन कुछ ही समय में ईरान ने इन दावों को खारिज कर दिया। ईरानी सैन्य प्रवक्ता ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका अपनी हार को समझौता बताने की कोशिश कर रहा है।
ईरान ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में स्थिरता उसकी सैन्य ताकत पर निर्भर है और वह किसी दबाव में समझौता नहीं करेगा। अधिकारियों ने यह भी कहा कि मौजूदा हालात तब तक नहीं बदलेंगे, जब तक ईरान खुद ऐसा नहीं चाहता। उन्होंने अमेरिका पर भरोसा न करने की बात भी दोहराई, खासकर तब जब बातचीत के दौरान ही सैन्य कार्रवाई की गई थी।
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका की रणनीति दोहरी नजर आ रही है। एक ओर वह कूटनीतिक समाधान की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर मिडिल ईस्ट में अतिरिक्त सैनिक तैनात कर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाकर ईरान पर दबाव बनाना चाहता है।
ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य को अवरुद्ध कर दिया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ा है। चार सप्ताह से जारी इस संघर्ष में ईरान लगातार डटा हुआ है और किसी भी समझौते से पहले अपनी शर्तों को प्राथमिकता दे रहा है। इससे क्षेत्र में अनिश्चितता और तनाव और गहरा गया है।









