दिल्ली हाईकोर्ट ने लैंड-फॉर-जॉब घोटाले में आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की FIR रद्द करने की याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस रविंदर डुडेजा ने याचिका को आधारहीन बताया और कहा कि प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट (PC एक्ट) की धारा 17A इस मामले पर लागू नहीं होती क्योंकि यह प्रोविजन केवल भविष्य में होने वाले मामलों पर लागू होता है।
इस मामले में CBI ने 2004 से 2009 के दौरान कथित भ्रष्टाचार के आरोपों के आधार पर 18 मई 2022 को FIR दर्ज की थी। लालू यादव की याचिका में कहा गया था कि FIR दर्ज करने से पहले CBI ने आवश्यक प्रॉसिक्यूशन मंजूरी नहीं ली, जो कानूनी रूप से अनिवार्य थी। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत में यह तर्क रखा कि FIR इस मामले में बिना कानूनी अनुमति के दर्ज की गई।
हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 17A का उद्देश्य भविष्य में सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार जांच के लिए अनुमति लेना है, और 2004-2009 के समय के आरोपों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता। कोर्ट ने कहा कि मंजूरी न लेने का मामला FIR, जांच या कोर्ट के आदेशों पर असर नहीं डालता। इसलिए याचिका को खारिज किया गया।
यह मामला CBI के उन आरोपों से जुड़ा है जिसमें कहा गया है कि लालू यादव के रेल मंत्री रहते हुए, रेलवे में ग्रुप D की नियुक्तियों के बदले उनके परिवार को जमीन के टुकड़े कम कीमत पर ट्रांसफर किए गए। कथित तौर पर यह लेन-देन पटना और अन्य जगहों पर हुआ। लालू परिवार ने इन आरोपों को राजनीति प्रेरित करार दिया है और इसे पूरी तरह खारिज किया है। यह फैसला लालू यादव के लिए एक बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है, क्योंकि इससे अब जांच पर रोक लगाने या FIR रद्द कराने की संभावनाएं फिलहाल समाप्त हो गई हैं।









