भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को कहा कि भारत अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान रूस के साथ सहयोग को और गहरा करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि वैश्विक और साझा चुनौतियों का संतुलित और समावेशी समाधान किया जा सके। उन्होंने यह बयान ‘इंडिया एंड रशिया: टुवर्ड्स अ न्यू बाइलेट्रल एजेंडा’ शीर्षक वाले वर्चुअल सम्मेलन में दिया। जयशंकर ने भारत और रूस के लंबे समय से चले आ रहे द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने बताया कि दिसंबर 2025 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा ने द्विपक्षीय संबंधों को कई नए और विविध क्षेत्रों में विस्तार दिया। इस दौरे के दौरान कुशल पेशेवरों की आवाजाही, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा, समुद्री सहयोग, उर्वरक, कस्टम और व्यापार, शैक्षणिक और मीडिया सहयोग जैसे क्षेत्रों में नई पहल हुई।
विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि भारत और रूस 68.7 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 100 अरब डॉलर तक बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसके लिए दोनों देशों ने यूरेशियन आर्थिक संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप देने, गैर-टैरिफ बाधाओं और नियामकीय अड़चनों को दूर करने तथा भारतीय कुशल कार्यबल के बेहतर उपयोग पर जोर दिया। जयशंकर ने बताया कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने रूस के काल्मिकिया क्षेत्र में भारत से भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी का उदाहरण साझा करते हुए इसे द्विपक्षीय सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक बताया।
विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि रूस के येकातेरिनबर्ग और कजान में भारत के नए वाणिज्य दूतावास खुलने से आर्थिक, सांस्कृतिक और सामाजिक रिश्तों को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने वैश्विक बदलती परिस्थितियों और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के संदर्भ में BRICS, SCO, G20 और संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों पर सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।









