पश्चिम बंगाल की सियासी हलचल तेज होती ही एक बड़ा राजनीतिक मोड़ सामने आया है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने घोषणा की कि उनकी पार्टी पूर्व टीएमसी नेता हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी के साथ गठबंधन कर विधानसभा चुनाव में भाग लेगी। यह कदम राज्य में चुनावी समीकरण को और दिलचस्प बना रहा है और सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनौती पेश कर सकता है।
ओवैसी ने कहा कि गठबंधन 23 और 29 अप्रैल को होने वाले दो चरणों के मतदान में कई सीटों पर उम्मीदवार उतारेगा। सूत्रों के अनुसार, एआईएमआईएम मुस्लिम बहुल जिलों जैसे मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर की चुनिंदा आठ से 10 सीटों पर केंद्रित होगी, जबकि बाकी सीटों पर हुमायूं कबीर की पार्टी मोर्चा संभालेगी।
जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने मतदाताओं से भावनात्मक अपील की और कहा कि अब समय आ गया है कि लोग अपनी राजनीतिक ताकत को पहचानें। उन्होंने चेताया कि अल्पसंख्यक समुदाय को अक्सर वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है और चुनाव के बाद उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जाता। उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समुदाय की आवाज विधानसभा में मजबूती से सुनाई दे।
हुमायूं कबीर ने कहा कि मुर्शिदाबाद में नई बाबरी मस्जिद का निर्माण एक संवेदनशील मुद्दा है और इसे चुनावी विमर्श में शामिल किया जाएगा। उनका दावा है कि गठबंधन सरकार बनाता है तो पहली बार कोई मुस्लिम मुख्यमंत्री बन सकता है। इस गठबंधन को मुस्लिम वोट बैंक का 5-10% हिस्सा अपने पक्ष में खींचने की क्षमता रखने वाला ‘एक्स फैक्टर’ माना जा रहा है, जो कई सीटों के नतीजों को प्रभावित कर सकता है।









