दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष एक अभ्यावेदन दाखिल कर आबकारी नीति से जुड़े आपराधिक पुनरीक्षण मामले को दूसरी पीठ में स्थानांतरित करने की मांग की है। यह मामला फिलहाल न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ के समक्ष लंबित है। केजरीवाल, जो इस मामले में प्रतिवादी संख्या 18 हैं, ने मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया है कि “मास्टर ऑफ रोस्टर” के अधिकार का उपयोग करते हुए मामले को किसी अन्य उपयुक्त पीठ को सौंपा जाए, ताकि न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता और तटस्थता पर जनता का विश्वास बना रहे।
11 मार्च को दिए गए इस अभ्यावेदन में केजरीवाल ने कहा कि 9 मार्च को हुई पहली सुनवाई के दौरान कुछ ऐसे घटनाक्रम सामने आए जिनसे चिंता पैदा हुई है। उनके अनुसार, अदालत ने प्रारंभिक सुनवाई में ही नोटिस जारी करते हुए निचली अदालत के बरी करने के आदेश को प्रथम दृष्टया “त्रुटिपूर्ण” बताया, जबकि अभी तक आरोपियों की सुनवाई नहीं हुई थी।
अभ्यावेदन में यह भी कहा गया कि अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्यवाही से जुड़े अंतरिम निर्देश जारी किए, जबकि ईडी इस पुनरीक्षण याचिका में पक्षकार नहीं है। केजरीवाल का तर्क है कि सीबीआई की याचिका में ईडी से संबंधित राहत की मांग भी नहीं की गई थी। इसके अलावा, जवाब दाखिल करने के लिए केवल एक सप्ताह का समय दिए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। अभ्यावेदन में कहा गया है कि इतने बड़े और जटिल मामले में यह समयावधि असामान्य रूप से कम है, जिससे निष्पक्ष सुनवाई को लेकर आशंकाएं बढ़ सकती हैं।









