देशभर में लंबे समय से लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए 14 मार्च 2026 को इस साल की पहली नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है। National Legal Services Authority के तत्वावधान में लगने वाली इस लोक अदालत में लोग आपसी सहमति के जरिए अपने पुराने विवादों को बहुत कम समय में सुलझा सकते हैं। इसका मकसद अदालतों में लंबित मामलों का बोझ कम करना और लोगों को जल्दी न्याय दिलाना है। लोक अदालत की सबसे खास बात यह है कि यहां किसी की जीत या हार नहीं होती, बल्कि दोनों पक्ष आपसी समझौते से विवाद खत्म करते हैं। इस मंच पर बैंक लोन रिकवरी, बिजली और पानी के बिल विवाद, चेक बाउंस के मामले, छोटे सिविल विवाद, ट्रैफिक चालान और पति-पत्नी के बीच भरण-पोषण जैसे मामलों का आसानी से निपटारा किया जा सकता है। कई मामलों में लोगों को वन-टाइम सेटलमेंट और जुर्माने में छूट भी मिल जाती है।
लोक अदालत में समझौते के कई फायदे भी हैं। अगर कोई मामला पहले से कोर्ट में चल रहा है और वह लोक अदालत में सुलझ जाता है, तो जमा की गई कोर्ट फीस वापस मिल जाती है। इसके अलावा यहां दिया गया फैसला अंतिम और मान्य होता है, जिसके खिलाफ किसी ऊपरी अदालत में अपील नहीं की जा सकती। सबसे बड़ी बात यह है कि इस प्रक्रिया में वकील की अनिवार्यता नहीं होती और व्यक्ति खुद अपनी बात रख सकता है। यदि कोई व्यक्ति अपने मामले को लोक अदालत में ले जाना चाहता है, तो उसे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण या तहसील कार्यालय में आवेदन देना होगा। इसके बाद 14 मार्च को तय समय पर अदालत में दोनों पक्षों को बुलाया जाएगा, जहां जज और मध्यस्थ बातचीत के जरिए विवाद का समाधान करवाएंगे।









