मध्य पूर्व में जारी संघर्ष का असर अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी दिखाई देने लगा है। हाल के दिनों में रसोई गैस की सप्लाई प्रभावित होने की खबरों के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (ESMA) लागू करने का फैसला किया है। सरकार का मानना है कि अगर ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी सेवाओं में किसी तरह की बाधा आती है तो इसका सीधा असर आम लोगों के जीवन पर पड़ सकता है। इसी आशंका को देखते हुए यह कदम उठाया गया है ताकि गैस और ईंधन से संबंधित जरूरी सेवाएं बिना रुकावट जारी रह सकें।
बताया जा रहा है कि 28 फरवरी से मध्य पूर्व में इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के कारण होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाली तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है, इसलिए यहां किसी भी तरह की बाधा का असर वैश्विक बाजारों के साथ-साथ भारत जैसे आयातक देशों पर भी पड़ता है। देश के कई हिस्सों में एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता को लेकर चिंता जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आपूर्ति लंबे समय तक प्रभावित रहती है तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता पर भी दबाव बढ़ सकता है।
सरकार ने साफ किया है कि ESMA लागू करने का उद्देश्य आवश्यक सेवाओं को सुचारू बनाए रखना और किसी भी तरह की हड़ताल या कामकाज में रुकावट को रोकना है। इसके जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी व्यवस्थाएं सामान्य रूप से चलती रहें और आम लोगों को किसी बड़े संकट का सामना न करना पड़े। फिलहाल सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और आपूर्ति व्यवस्था को स्थिर रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।









