National

गृह मंत्रालय ने लुक आउट सर्कुलर (LOC) प्रक्रिया में किया बड़ा बदलाव

गृह मंत्रालय ने लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी करने के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की है। अब राष्ट्रीय महिला आयोग, मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और राष्ट्रीय कंपनी कानून अधिकरण जैसे वैधानिक निकाय सीधे ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन (BoI) से LOC जारी करने का अनुरोध नहीं कर सकेंगे। ऐसे सभी अनुरोध अब केवल कानून प्रवर्तन एजेंसियों के माध्यम से ही भेजे जाएंगे।

इस कदम का उद्देश्य LOC के दुरुपयोग को रोकना और प्रक्रिया को अधिक सख्त बनाना है। मंत्रालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन निकायों के पास आपराधिक क्षेत्राधिकार नहीं है, वे LOC के लिए सीधे आवेदन नहीं कर सकते। अगर BoI को ऐसे किसी अनुरोध या आदेश मिलता है, तो उसे तुरंत वापस कर दिया जाएगा और संबंधित निकाय को सूचित किया जाएगा कि वे अधिकृत नहीं हैं।

पुरानी व्यवस्था में ये निकाय सीधे LOC के लिए अनुरोध कर सकते थे, हालांकि पुलिस जैसी एजेंसियों को पूरी जानकारी देने की शर्त थी। नए नियमों में LOC के फॉर्म को भी अपडेट किया गया है। अब इसमें तीन मानकीकृत विकल्प शामिल हैं: “रोकें और अनुरोधकर्ता को सूचित करें”, “प्रस्थान रोकें और सूचित करें” और “टिप्पणियां देखें और कार्रवाई करें”। खुफिया एजेंसियां केवल काउंटर-टेररिज्म मामलों में तीसरे विकल्प का उपयोग कर सकती हैं।

किसी कोर्ट द्वारा LOC को हटाने या निलंबित करने के आदेश के मामले में, अब आदेश सीधे ओरिजिनेटर एजेंसी के जरिए BoI तक जाएगा। इमिग्रेशन अधिकारी सीधे आदेश मिलने पर तुरंत ओरिजिनेटर को सूचित करेंगे और एजेंसी को सात कार्य दिवस के भीतर जवाब देना अनिवार्य होगा।

इसके अलावा LOC वाले व्यक्ति की हिरासत संबंधी प्रक्रिया भी स्पष्ट की गई है। व्यक्ति के पता चलने पर BoI को तुरंत ओरिजिनेटर को सूचित करना होगा। यदि तीन घंटे में हिरासत नहीं ली जाती, तो व्यक्ति को स्थानीय पुलिस के हवाले किया जाएगा, और ओरिजिनेटर को अगले 24 घंटे में कार्रवाई करनी होगी, जिसे BoI निगरानी करेगा। यह बदलाव LOC प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और नियंत्रित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।