भारतीय वायुसेना (IAF) अपने पुराने जगुआर लड़ाकू विमानों को नई तकनीक से लैस करने की योजना बना रही है। रक्षा मंत्रालय ने घरेलू कंपनियों से 74 जगुआर विमानों के अपग्रेड के लिए टेंडर आमंत्रित किए हैं। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य इन विमानों की लड़ाकू क्षमता और पायलट की स्थिति जागरूकता को आधुनिक बनाना है। इस अपग्रेड के तहत 24 जगुआर डारिन-II और 50 जगुआर डारिन-III विमानों में सुधार किया जाएगा। इनमें मौजूदा मैजिक एयर-टू-एयर मिसाइल प्रणाली को हटाकर नई नेक्स्ट जेनरेशन क्लोज कॉम्बैट मिसाइल (NGCCM) लगाई जाएगी। यह एडवांस्ड शॉर्ट रेंज मिसाइल हवाई लड़ाई में रिएक्शन समय और निशानेबाजी की सटीकता को बढ़ाएगी।
साथ ही पायलटों के लिए हेलमेट माउंटेड डिस्प्ले सिस्टम (HMDS) भी जोड़ा जाएगा। इस सिस्टम से पायलट हेलमेट के वाइजर पर ही उड़ान और लक्ष्य से जुड़ी जानकारी देख पाएंगे और सिर घुमाकर मिसाइल को लक्षित कर सकेंगे। अपग्रेड का काम देश के प्रमुख एयरबेस जैसे अंबाला, जामनगर, भुज, सूरतगढ़ और गोरखपुर में होगा, जबकि तकनीकी परीक्षण बेंगलुरु स्थित हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) में किए जाएंगे। एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टैब्लिशमेंट भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
सरकार की “आत्मनिर्भर भारत” नीति के तहत केवल भारतीय रक्षा कंपनियां इस टेंडर में भाग ले सकेंगी। चयनित कंपनी को तीन साल के भीतर सभी 74 विमानों का अपग्रेड पूरा करना होगा, जिसमें हर विमान के लिए लगभग 45 दिन का समय निर्धारित है। जगुआर विमान भारतीय वायुसेना में 1970 के दशक से सेवा में हैं और मुख्य रूप से लो-लेवल स्ट्राइक मिशनों में उपयोग होते हैं। अपग्रेड के बाद ये विमान आधुनिक हवाई खतरों का सामना अधिक प्रभावी ढंग से कर सकेंगे।









