भोपाल में आयोजित किसान महा-चौपाल में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते, सीमा सुरक्षा और कॉरपोरेट प्रभाव को लेकर सरकार को निशाने पर लिया। राहुल गांधी ने दावा किया कि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता कई महीनों तक कृषि हितों को लेकर रुकी रही, क्योंकि सरकार विदेशी कंपनियों को भारतीय कृषि बाजार में प्रवेश देने को लेकर दबाव में थी।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने कैबिनेट से परामर्श किए बिना ही अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति से बातचीत कर व्यापार समझौते को आगे बढ़ाया। उनके मुताबिक, इस फैसले से भारतीय किसानों के हित प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि समझौते के तहत डेटा सुरक्षा और कृषि उत्पादों के बाजार को लेकर चिंताएं जताई जा रही थीं।
चीन सीमा विवाद का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने पूर्व सैन्य नेतृत्व की एक पुस्तक का हवाला दिया और दावा किया कि सीमा पर तनाव के दौरान सैन्य अधिकारियों को उचित दिशा-निर्देश नहीं मिले। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय सेना प्रमुख को भी समय पर स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाया। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि संसद में उन्हें अपनी बात रखने से रोका गया, जिससे लोकतांत्रिक परंपराओं पर सवाल खड़े होते हैं।
इसके अलावा, राहुल गांधी ने कॉरपोरेट और राजनीतिक संबंधों को लेकर भी तीखे आरोप लगाए। उन्होंने अमेरिका में चल रही कानूनी जांचों का उल्लेख करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय दबाव की राजनीति भी भारत की आर्थिक नीतियों को प्रभावित कर सकती है। उनके भाषण में सरकार की विदेश नीति और आर्थिक फैसलों को लेकर कई सवाल उठाए गए, जबकि भाजपा की ओर से इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया गया। कुल मिलाकर, इस भाषण ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है, जहां विपक्ष और सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होता दिख रहा है।









