भारत की सैन्य तैयारियों में एक अहम बदलाव तब देखने को मिला, जब चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने मिलिटरी क्वॉन्टम मिशन पॉलिसी फ्रेमवर्क जारी किया। यह नीति भविष्य के युद्धों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, जिसमें तकनीक को युद्ध क्षमता का केंद्र बनाया गया है। इसका उद्देश्य थल सेना, नौसेना और वायु सेना को आने वाले दशकों के अत्याधुनिक युद्ध परिदृश्य के लिए तैयार करना है।
इस नीति के तहत क्वॉन्टम तकनीक के चार प्रमुख क्षेत्रों-क्वॉन्टम संचार, क्वॉन्टम कंप्यूटिंग, क्वॉन्टम सेंसिंग व मेट्रोलॉजी और क्वॉन्टम सामग्री व उपकरण-को रक्षा प्रणाली में एकीकृत किया जाएगा। इससे सूचना सुरक्षा, तेज निर्णय क्षमता और सटीक निगरानी में भारत को बढ़त मिलने की उम्मीद है।
इस मौके पर तीनों सेनाओं के प्रमुख और इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के प्रमुख की मौजूदगी ने स्पष्ट कर दिया कि यह नीति संयुक्त सैन्य प्राथमिकता है। दस्तावेज में राष्ट्रीय क्वॉन्टम मिशन के साथ समन्वय और नागरिक-सैन्य सहयोग पर भी जोर दिया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, भविष्य के युद्ध पारंपरिक हथियारों से नहीं, बल्कि डेटा, एल्गोरिदम और उन्नत तकनीक से लड़े जाएंगे। ऐसे में यह नीति भारत को रणनीतिक, साइबर और परमाणु प्रतिरोध के मोर्चे पर मजबूत बना सकती है।









