भारत की समुद्री सीमाओं पर नई चुनौती उभर रही है. पाकिस्तान अगले साल चीन में बनी एडवांस ‘हैंगर-क्लास’ डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां शामिल करना शुरू करेगा, जिससे हिंद महासागर और अरब सागर में भारत की नौसैनिक बढ़त पर असर पड़ सकता है. पाकिस्तान और चीन मिलकर कुल आठ पनडुब्बियां बना रहे हैं, जिनमें आधी चीन में और आधी पाकिस्तान में तैयार होंगी. ये पनडुब्बियां 2028 तक सेवा में शामिल होंगी.
हैंगर-क्लास पनडुब्बियां स्टर्लिंग एयर-इंडीपेन्डेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक से लैस हैं, जिससे यह कई हफ्तों तक सतह पर आए बिना पानी के नीचे रह सकती हैं. फिलहाल भारतीय नौसेना के पास कोई AIP पनडुब्बी नहीं है. इससे पाकिस्तान की एंटी-एक्सेस/एरिया डेनियल (A2/AD) क्षमता अरब सागर में बढ़ जाएगी.
भारतीय नौसेना के पास फ्रांसीसी स्कॉर्पीन, रूसी किलो और जर्मन HDW पनडुब्बियां हैं, साथ ही दो परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां सेवा में हैं. हालांकि, पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक बेड़े घटता जा रहा है. प्रोजेक्ट-75 इंडिया (P-75I) के तहत छह नई AIP पनडुब्बियां बनाई जाएंगी, लेकिन उनका पहला हिस्सा आने में कई साल लग सकते हैं.
चीन-पाक सामरिक साझेदारी और पाकिस्तान की बढ़ती नौसैनिक ताकत भारत के लिए रणनीतिक चुनौती पैदा कर रही है. भारतीय नौसेना के पास अत्याधुनिक पनडुब्बी-रोधी विमान, हेलीकॉप्टर और वॉरशिप्स हैं, लेकिन बेड़े का घटता आकार चिंता का विषय है. भारत को AIP तकनीक वाली नई पनडुब्बियों को तेजी से शामिल करना होगा, ताकि अरब सागर और हिंद महासागर में उसकी बढ़त कायम रहे.









