ऋषिकेश, 29 सितंबर 2025: ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (AIIMS) ऋषिकेश एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला कार्डियोलॉजी विभाग की 16 बेड वाली कोरोनरी केयर यूनिट (CCU) से जुड़ा है, जिसमें 8 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने के बावजूद यूनिट कभी चालू नहीं हुई। आरोप है कि सप्लाई किए गए उपकरण घटिया थे और कई जरूरी सामान अधूरा या गायब था।
जानकारी के मुताबिक, एम्स प्रशासन ने 5 दिसंबर 2017 को टेंडर जारी किया था। दिल्ली की कंपनी MS Pro Medic Devices को कार्य सौंपा गया, जिसने 2019-20 में दो किस्तों में उपकरण सप्लाई किए और इसके बदले 8.08 करोड़ रुपये का बिल थमाया। हालांकि, CCU कभी शुरू नहीं हो सकी और मरीजों को इसका कोई लाभ नहीं मिला।
जांच में गंभीर खामियां सामने आई हैं। CBI और एम्स अधिकारियों की संयुक्त जांच में पाया गया कि कई उपकरण तय मानकों पर खरे नहीं उतरे, कुछ सामान गायब थे और टेंडर से जुड़ी अहम फाइलें भी लापता थीं।
इस घोटाले में एम्स के पूर्व निदेशक डॉ. रविकांत, पूर्व खरीद अधिकारी डॉ. राजेश पसरीचा और पूर्व स्टोर कीपर रूप सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इसके अलावा कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और निजी लोगों पर भी शक जताया गया है। CBI ने 26 सितंबर को आधिकारिक रूप से केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस घोटाले में और कौन लोग शामिल हैं। आने वाले दिनों में और बड़े नामों के खुलासे की संभावना है।









