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भारतीय सेना का बड़ा फैसला, अब हर जवान को मिलेगी ड्रोन ऑपरेशन की ट्रेनिंग

भारतीय सेना ने आधुनिकीकरण की दिशा में एक अहम कदम बढ़ाते हुए अब हर सैनिक को ड्रोन उड़ाने की ट्रेनिंग देने का फैसला किया है. इस नई पहल को “Eagle in the Arm” नाम दिया गया है, जिसका उद्देश्य हर जवान की ताकत में एक “उड़ता हुआ हथियार” जोड़ना है. अब सिर्फ बंदूकें नहीं, बल्कि आसमान से नजर रखने और हमला करने वाले ड्रोन भी जवानों के हथियार बनेंगे.

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पहली बार बड़े पैमाने पर ड्रोन और स्वार्म टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया था। इसके जरिए दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम  जिनमें चीन निर्मित HQ-9B और HQ-16 मिसाइल शामिल थे- को पूरी तरह निष्क्रिय कर दिया गया था. ड्रोन ने दुश्मन की रडार साइट्स को अंधा कर, सेना और वायुसेना को गहराई में घुसकर कार्रवाई करने का मौका दिया.

विश्वभर में हालिया युद्धों जैसे- यूक्रेन-रूस, इजरायल-गाज़ा, और अजरबैजान-आर्मेनिया ने साबित किया है कि ड्रोन आज के समय में युद्ध की दिशा तय कर सकते हैं. इन्हीं अनुभवों के आधार पर भारतीय सेना अब हर इन्फैंट्री बटालियन में ड्रोन प्लाटून तैनात करेगी और आर्टिलरी रेजीमेंट्स को काउंटर-ड्रोन सिस्टम व लॉइटरिंग म्यूनिशन से लैस किया जाएगा. सेना ने देहरादून, महू और चेन्नई में ड्रोन ट्रेनिंग सेंटर शुरू कर दिए हैं और आने वाले समय में 1,000 ट्रेनिंग ड्रोन, 600 सिम्युलेटर और 19 नए ट्रेनिंग सेंटर्स की योजना भी बनाई गई है.