Jammu & Kashmir National

POK में क्या है पूरा विवाद? रावलकोट से मुजफ्फराबाद तक भड़की हिंसा

पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर (POJK) एक बार फिर गंभीर अशांति और हिंसा की चपेट में है। आम लोगों के विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बाद स्थिति और बिगड़ गई है। हालिया झड़पों में कई लोगों की मौत और बड़ी संख्या में घायल होने की खबरें सामने आई हैं, हालांकि मृतकों के आंकड़ों को लेकर आधिकारिक और स्थानीय दावों में भारी अंतर है। कुछ सोशल मीडिया रिपोर्टों में यह संख्या और अधिक बताई जा रही है।

इस क्षेत्र में असंतोष की जड़ें नई नहीं हैं। 1947 के विभाजन और कश्मीर विवाद के बाद से यह इलाका पाकिस्तान के नियंत्रण में है, लेकिन लंबे समय से स्थानीय लोग संसाधनों पर अधिकार, राजनीतिक स्वायत्तता और विकास को लेकर नाराजगी जताते रहे हैं। आरोप है कि महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसलों पर वास्तविक नियंत्रण इस्लामाबाद का रहता है, जबकि स्थानीय आबादी को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता। 2023 में बढ़ते बिजली बिल और महंगाई के खिलाफ शुरू हुआ विरोध धीरे-धीरे संगठित आंदोलन में बदल गया, जिसके बाद संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) का गठन हुआ। इस मंच ने कई सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक मांगें उठाईं, जिनमें सस्ती बिजली, सब्सिडी की बहाली और स्थानीय अधिकार शामिल हैं।

2024 और 2025 में भी बड़े पैमाने पर प्रदर्शन और हड़तालें हुईं, जिनके बाद सरकार ने कुछ आर्थिक राहत उपाय किए, लेकिन मूल मांगें अनसुलझी रहीं। जून 2026 में हालात और बिगड़ गए जब आंदोलन पर प्रतिबंध लगाया गया और नेताओं की गिरफ्तारी के बाद तनाव बढ़ गया। ताजा घटनाओं में रावलकोट और मुजफ्फराबाद समेत कई क्षेत्रों में प्रदर्शन जारी हैं। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव के बाद हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। आंदोलनकारी दमन के आरोप लगा रहे हैं, जबकि प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई है। स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।