Yogi Adityanath की अध्यक्षता में सोमवार (18 मई) को हुई कैबिनेट बैठक में 12 अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इस बैठक में सबसे महत्वपूर्ण निर्णय ग्रामीण स्थानीय निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण को अधिक पारदर्शी और अनुपातिक बनाने को लेकर लिया गया। इसके लिए उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को हरी झंडी दी गई है।
सरकार का उद्देश्य त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था—ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत—में OBC आरक्षण को जनसंख्या और सामाजिक-आर्थिक स्थिति के आधार पर अधिक सटीक तरीके से लागू करना है। यह कदम अदालत के निर्देशों के अनुपालन में उठाया गया है।
आयोग में कुल पांच सदस्य होंगे, जिनमें पिछड़ा वर्ग से जुड़े विशेषज्ञ शामिल किए जाएंगे। इनमें एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायाधीश को अध्यक्ष बनाया जाएगा। आयोग का कार्यकाल सामान्यतः छह महीने का होगा। यह आयोग राज्य के सभी 75 जिलों में जाकर जातिवार और सामाजिक आंकड़ों का अध्ययन करेगा और इसके आधार पर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा।
राज्य में पहले से ही पंचायती राज अधिनियम 1947 और क्षेत्र पंचायत व जिला पंचायत अधिनियम 1961 के तहत आरक्षण की व्यवस्था लागू है। OBC वर्ग के लिए अधिकतम 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। हालांकि, हालिया न्यायिक निर्देशों के बाद सरकार अब डेटा आधारित नई व्यवस्था लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
आयोग की रिपोर्ट के बाद आरक्षण पर आपत्तियां भी आमंत्रित की जाएंगी, जिनके निस्तारण में लगभग एक महीने का समय लग सकता है। पूरी प्रक्रिया के चलते पंचायत चुनावों के समय को लेकर भी असमंजस बना हुआ है, और संभावना जताई जा रही है कि चुनाव 2027 के विधानसभा चुनावों के बाद कराए जा सकते हैं। इस बीच पंचायतों का प्रशासनिक संचालन वैकल्पिक व्यवस्था के तहत किया जा सकता है।









