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केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, अब बिना लाइसेंस नहीं होगा चांदी का आयात

केंद्र सरकार ने चांदी के आयात को लेकर सख्त कदम उठाते हुए इसे ‘फ्री कैटेगरी’ से हटाकर ‘रिस्ट्रिक्टेड कैटेगरी’ में शामिल कर दिया है। इसका मतलब है कि अब विदेश से चांदी मंगाने के लिए व्यापारियों और कंपनियों को पहले सरकार से अनुमति या लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। यह नया नियम शनिवार से लागू कर दिया गया है।

सरकार का यह फैसला हाल के महीनों में चांदी के आयात में तेज बढ़ोतरी को देखते हुए लिया गया है। विशेष रूप से अप्रैल 2026 में चांदी के आयात में भारी उछाल दर्ज किया गया, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही थी। सरकार का मानना है कि सोना और चांदी जैसे कीमती धातुओं के अत्यधिक आयात से देश का व्यापार घाटा प्रभावित हो सकता है, इसलिए गैर-जरूरी आयात को नियंत्रित करना जरूरी है।

आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में चांदी का आयात पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 157% बढ़कर 411.06 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जबकि अप्रैल 2025 में यह 159.85 मिलियन डॉलर था। इसी तरह पूरे वित्त वर्ष 2026 में चांदी का आयात 149% बढ़कर 12.05 अरब डॉलर हो गया। सरकार ने पहले ही सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद मांग में कमी नहीं आई। अब चांदी को HS कोड के तहत सिल्वर बार और बुलियन जैसी श्रेणियों में ‘रिस्ट्रिक्टेड’ कर दिया गया है।

इस फैसले का असर आने वाले समय में सप्लाई और कीमतों पर पड़ सकता है। चूंकि अब आयात प्रक्रिया अधिक सख्त हो जाएगी, इसलिए बाजार में चांदी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। सरकार का उद्देश्य विदेशी मुद्रा की बचत और अर्थव्यवस्था पर दबाव कम करना है।