अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक संबंधों के बीच एक नया मामला सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने ईरान के तेल कारोबार को प्रतिबंधों से बचाने में कथित तौर पर मदद करने के आरोप में भारतीय कारोबारी और उनसे जुड़े लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने बुधवार को चंडीगढ़ के कारोबारी सुनील कुमार शर्मा, उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद और कई भारतीय कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इन लोगों पर एक ऐसे नेटवर्क का संचालन करने का आरोप है, जो ईरान से जुड़े तेल परिवहन करने वाले जहाजों को फर्जी पंजीकरण और प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराता था। इसके जरिए कथित तौर पर ईरानी पेट्रोलियम के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर लगाए गए प्रतिबंधों से बचने में मदद की जा रही थी।
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने भारत से जुड़े कुल नौ संस्थानों को प्रतिबंधित सूची में शामिल किया है। इसके अलावा तुर्किये की एक कंपनी पर भी कार्रवाई की गई है। इस कंपनी पर ईरान की छह प्रतिबंधित एयरलाइंस को जमीन पर आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने का आरोप लगाया गया है। यह पूरी कार्रवाई ट्रंप प्रशासन के अभियान ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ के तहत की गई है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ईरान की तेल बिक्री और अन्य आर्थिक गतिविधियों से होने वाली आय पर रोक लगाना है, ताकि उसकी सरकार पर आर्थिक दबाव बढ़ाया जा सके।
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इस कार्रवाई को लेकर कहा कि ईरानी सरकार को आर्थिक या अन्य किसी भी तरह का समर्थन देने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जमीन, समुद्र और हवाई मार्ग के जरिए ईरान की मदद करने वाले नेटवर्क को निशाना बनाने की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। अमेरिका ने यह भी संकेत दिया है कि ईरान पर आर्थिक दबाव बनाने की उसकी रणनीति जारी रहेगी। इस कार्रवाई से भारत से जुड़े कारोबारी नेटवर्क पर भी अमेरिकी प्रतिबंधों का असर पड़ सकता है।


