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UP: 69 हजार शिक्षक भर्ती मामला: सुप्रीम कोर्ट में फिर हुई सुनवाई, 22 सितंबर को अगली सुनवाई

उत्तर प्रदेश की 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती का विवाद अब भी जारी है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर सुनवाई हुई, जहां चयनित अभ्यर्थियों की ओर से वकीलों ने अपनी दलीलें रखीं। वकीलों ने कहा कि यदि लखनऊ हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा जाता है तो पिछले करीब छह वर्षों से नौकरी कर रहे लगभग 10 हजार शिक्षक भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो सकते हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अंतिम फैसला कानून और सही तथ्यों के आधार पर लिया जाएगा।

सुनवाई के दौरान आरक्षण को लेकर भी सवाल उठाए गए। चयनित अभ्यर्थियों की ओर से दलील दी गई कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को टीईटी में आरक्षण का लाभ मिला और बाद में भर्ती प्रक्रिया में भी इसका लाभ लिया गया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि टीईटी भर्ती परीक्षा नहीं, बल्कि पात्रता परीक्षा है। ऐसे में इसे दोहरे आरक्षण के रूप में कैसे देखा जा सकता है, यह सवाल कोर्ट ने उठाया।

वकीलों ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट के फैसले के आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ने पर केवल 817 अनारक्षित अभ्यर्थियों को नियुक्ति का लाभ मिल सकेगा, जबकि आरक्षित वर्ग के प्रभावित अभ्यर्थियों की संख्या काफी अधिक है। वहीं, चयनित अभ्यर्थियों की ओर से वकील शोभा गुप्ता ने तर्क दिया कि आरक्षण की छूट का लाभ लेने वाले अभ्यर्थी अधिक अंक आने पर सामान्य वर्ग की सीट पर माइग्रेट नहीं कर सकते।

बता दें कि 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती का नोटिफिकेशन दिसंबर 2018 में जारी हुआ था। परीक्षा जनवरी 2019 में हुई और मई 2020 में परिणाम घोषित किया गया। भर्ती में आरक्षण के नियमों के पालन को लेकर विवाद सामने आया था। इसके बाद मामला हाईकोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने 37,339 पदों पर भर्ती रोक दी थी, जबकि 31,661 पदों पर भर्ती का रास्ता साफ किया था। अब मामले में अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी।