बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping के बीच एक अहम और ऐतिहासिक शिखर बैठक हुई। इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने वैश्विक स्थिरता बनाए रखने और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर सहमति जताई। बैठक में ताइवान, हॉर्मुज स्ट्रेट, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और आर्थिक सहयोग जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। यह 2017 के बाद चीन में दोनों नेताओं की पहली आमने-सामने मुलाकात थी। बैठक ऐसे समय पर हुई जब दुनिया ऊर्जा संकट, भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अस्थिरता जैसी चुनौतियों से जूझ रही है।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ताइवान मुद्दे को सबसे संवेदनशील बताते हुए चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की गलत रणनीति दोनों देशों के बीच गंभीर तनाव या संघर्ष का कारण बन सकती है। उन्होंने कहा कि बड़े देशों को टकराव की बजाय सहयोग का रास्ता अपनाना चाहिए और “थ्यूसीडाइड्स ट्रैप” से बचना चाहिए। दोनों नेताओं ने इस बात पर भी सहमति जताई कि हॉर्मुज स्ट्रेट, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, उसे हमेशा खुला और सुरक्षित रखा जाना चाहिए। साथ ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी दोनों पक्ष इस बात पर एकमत दिखे कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देना चाहिए।
व्हाइट हाउस के अनुसार, इस बैठक में व्यापार, निवेश और बाजार पहुंच जैसे मुद्दों पर भी सकारात्मक चर्चा हुई। ट्रंप ने चीनी बाजार को अमेरिकी कंपनियों के लिए और अधिक खोलने की बात कही, जबकि चीन से अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीद बढ़ाने पर भी सहमति बनी। बैठक में दोनों देशों के कई प्रमुख उद्योगपतियों की भी उपस्थिति रही, जिनमें एलन मस्क और टिम कुक जैसे नाम शामिल थे। बैठक के बाद आयोजित भोज में ट्रंप ने शी जिनपिंग और उनकी पत्नी को वाइट हाउस आने का औपचारिक निमंत्रण भी दिया।









