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ट्रायल इन एब्सेंशिया: अब आरोपी की गैरमौजूदगी में भी चलेगा मुकदमा

26/11 मुंबई आतंकी हमले से जुड़े मामले में भारत पहली बार ‘ट्रायल इन एब्सेंशिया’ यानी आरोपी की गैरमौजूदगी में मुकदमा चलाने की प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। इस मामले में पाकिस्तान में मौजूद हाफिज सईद और उसके छह साथियों के खिलाफ भारतीय अदालत में उनकी अनुपस्थिति में सुनवाई हो सकेगी। यह प्रावधान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 356 के तहत लागू किया गया है। अब तक भारतीय आपराधिक न्याय व्यवस्था में आरोपी की मौजूदगी के बिना अंतिम ट्रायल और सजा सुनाने की सीमाएं थीं। पुराने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 299 के तहत फरार आरोपी के मामले में गवाहों के बयान दर्ज किए जा सकते थे, लेकिन अंतिम निर्णय आमतौर पर आरोपी के अदालत में पेश होने या पकड़े जाने के बाद ही संभव होता था।

नई व्यवस्था में अदालत पहले आरोपी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करेगी। इसके बाद सार्वजनिक नोटिस के जरिए उसे अदालत में पेश होने का अवसर दिया जाएगा। यदि नोटिस के 90 दिन के भीतर आरोपी अदालत में उपस्थित नहीं होता, तो उसे घोषित अपराधी मानकर उसकी गैरमौजूदगी में ट्रायल शुरू किया जा सकता है। इस दौरान आरोपी के कानूनी अधिकारों की रक्षा के लिए उसकी ओर से वकील नियुक्त किया जाएगा। अभियोजन पक्ष गवाहों, दस्तावेजों, डिजिटल और वैज्ञानिक साक्ष्यों को अदालत के सामने रखेगा और बचाव पक्ष का वकील उन पर जिरह करेगा। सभी साक्ष्यों के मूल्यांकन के बाद अदालत दोष सिद्ध होने पर सजा भी सुना सकती है। इस प्रावधान का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि कई आरोपी दूसरे देशों में शरण लेकर भारतीय कानून से बचते रहे हैं। 26/11 जैसे मामलों में यह व्यवस्था न्यायिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के साथ भारत के प्रत्यर्पण और अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रयासों को भी मजबूत आधार दे सकती है।