साल 2025 का अंत सुप्रीम कोर्ट के कई ऐतिहासिक फैसलों के साथ हो रहा है। अरावली पर्वत श्रृंखला की परिभाषा तय करने से लेकर आवारा कुत्तों की सुरक्षा, निठारी कांड में बरी करने का निर्णय और राष्ट्रपति के 14 सवालों पर संवैधानिक चर्चा शामिल हैं। वहीं विधि मंत्रालय ने 50 पुराने कानूनों को खत्म कर दैनिक कानूनी प्रशासन को सरल और जन-केंद्रित बनाया और एडीआर तंत्र को तेज करके लंबित मामलों को कम किया।
राष्ट्रपति के सवालों पर SC ने स्पष्ट किया कि अदालतें राज्यपालों या राष्ट्रपति पर समय-सीमा नहीं थोप सकतीं, लेकिन राज्यपाल अनिश्चित काल तक ‘पूर्ण वीटो’ का प्रयोग नहीं कर सकते। दिल्लीवासियों की सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बीएस-4 से पुराने वाहनों पर कार्रवाई और दिवाली पर सीमित ‘ग्रीन पटाखों’ की अनुमति दी।
निठारी कांड में मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली को विश्वसनीय साक्ष्य न होने के कारण बरी किया गया। आवारा कुत्तों के हमलों पर SC ने नसबंदी, टीकाकरण और शिविरों में स्थानांतरण के निर्देश दिए। वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025 के कुछ प्रावधानों पर रोक लगी, बाकी बहाल रहे। अरावली मामले में SC ने पर्यावरणविदों की चिंता मानी और नई समिति बनाने का आदेश दिया, खनन कंपनियों के लिए नियमों में छेड़छाड़ को खारिज किया। इस साल न्यायपालिका ने संवैधानिक संतुलन, सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण पर महत्वपूर्ण फैसले दिए।









