National

हाईवे सफर होगा ज्यादा सुरक्षित: अब गूगल मैप पहले ही देगा खतरे का अलर्ट

देश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने तकनीक आधारित सुरक्षा व्यवस्था को तेज़ी से लागू करना शुरू कर दिया है। अब राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर सफर करने वाले यात्रियों को ब्लैक स्पॉट, ब्लाइंड कर्व, डायवर्जन और कैटल स्पॉट जैसी खतरनाक जगहों की जानकारी पहले ही मिल जाएगी। यह सूचना गूगल मैप, मैप माय इंडिया और मोबाइल मैसेज अलर्ट के जरिए उपलब्ध कराई जाएगी।

NHAI ने इसके लिए अपने “डाटालेक” पोर्टल का तीसरा संस्करण तैयार किया है। इसमें उन सभी स्थानों का विस्तृत डेटा जोड़ा गया है, जहां सड़क हादसों की संभावना अधिक रहती है। देशभर में लगभग 80 हजार किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क पर हर साल करीब 1.80 लाख लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में होती है। ऐसे में यह पहल यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्राधिकरण के अनुसार, सर्वेक्षण में 424 ऐसे स्थान चिह्नित किए गए हैं जहां आवारा पशुओं की मौजूदगी अधिक रहती है। इन्हें “कैटल स्पॉट” के रूप में दर्ज किया गया है। इसके अलावा ब्लैक स्पॉट और ब्लाइंड कर्व जैसी दुर्घटना संभावित जगहों की भी मैपिंग की गई है।

NHAI, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के साथ मिलकर इस डेटा को API सेतु पोर्टल के जरिए गूगल मैप और अन्य नेविगेशन प्लेटफॉर्म तक पहुंचाएगा। साथ ही जियो और एयरटेल के सहयोग से यात्रियों को खतरनाक स्थलों से करीब डेढ़ किलोमीटर पहले मोबाइल अलर्ट भेजे जाएंगे। हालांकि, इस योजना के सामने एक बड़ी चुनौती भी है। देशभर के हाईवे पर करीब 1700 ऐसे हिस्से हैं जहां मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं है। इन क्षेत्रों में नेटवर्क आधारित सुरक्षा तकनीक प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पाएगी।