दिल्ली-एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की 16 जून को हुई अहम बैठक में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के मौजूदा दायरे को घटाने का प्रस्ताव खारिज कर दिया गया है। इस फैसले के साथ ही अब एनसीआर की सीमा में किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा और जो क्षेत्र अभी इसमें शामिल हैं, वे आगे भी यथावत बने रहेंगे।
बैठक में हरियाणा सरकार की ओर से एक प्रस्ताव रखा गया था, जिसमें राज्य के पांच जिलों—जैसे पानीपत, चरखी दादरी और जींद—को एनसीआर से बाहर करने की मांग की गई थी। लेकिन बोर्ड ने इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी। यह मुद्दा ड्राफ्ट रीजनल प्लान-2041 से जुड़ा हुआ था, जिस पर लंबे समय से चर्चा चल रही थी।
बैठक में हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के प्रतिनिधियों के साथ-साथ संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्री भी मौजूद रहे। हरियाणा सरकार का तर्क था कि एनसीआर में शामिल होने के कारण कई जिलों में विकास परियोजनाओं पर नियमों और प्रतिबंधों का असर पड़ता है, जिससे स्थानीय विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
हालांकि बोर्ड ने स्पष्ट किया कि एनसीआर का मौजूदा ढांचा ही आगे भी जारी रहेगा। इसके लिए एक सब-कमेटी का गठन किया गया है, जो अगस्त 2026 तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। वहीं अगली एनसीआर बोर्ड बैठक दिसंबर 2026 में आयोजित की जाएगी।
गौरतलब है कि यदि हरियाणा का प्रस्ताव स्वीकार हो जाता, तो एनसीआर का भौगोलिक क्षेत्र लगभग 100 किलोमीटर तक सीमित हो जाता और राज्य के कई जिलों का बड़ा हिस्सा इससे बाहर हो जाता। इससे हरियाणा के एनसीआर क्षेत्रफल में भी लगभग 60 प्रतिशत की कमी आने की संभावना थी, लेकिन अब यह बदलाव नहीं होगा।









