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सैलरी से TDS कटा, लेकिन जमा नहीं हुआ? जानिए ITAT के फैसले से कर्मचारियों को कैसे मिली बड़ी राहत

अगर आप नौकरीपेशा हैं और हर साल आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करते हैं, तो यह जानकारी आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। कई कर्मचारी केवल फॉर्म-16 और सैलरी स्लिप के आधार पर अपना ITR भर देते हैं। लेकिन कई बार कंपनियां कर्मचारियों की सैलरी से TDS (टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स) तो काट लेती हैं, लेकिन उसे समय पर आयकर विभाग के खाते में जमा नहीं करातीं। ऐसी स्थिति में कर्मचारी के फॉर्म 26AS में टैक्स क्रेडिट दिखाई नहीं देता और उसे आयकर विभाग से नोटिस या अतिरिक्त टैक्स की मांग का सामना करना पड़ सकता है।

हाल ही में आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) ने ऐसे ही एक मामले में कर्मचारियों के हित में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। मामला एडटेक कंपनी बायजूज़ से जुड़ा था, जहां कंपनी ने एक कर्मचारी की सैलरी से करीब 1.49 करोड़ रुपये का TDS काट लिया, लेकिन उसे सरकार के खाते में जमा नहीं कराया। बताया गया कि इस चूक का असर कंपनी के 23,621 कर्मचारियों पर पड़ा। ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यदि नियोक्ता कर्मचारी की सैलरी से TDS काट चुका है, तो उसकी जमा कराने की जिम्मेदारी पूरी तरह कंपनी की है। यदि कंपनी अपनी कानूनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहती है, तो कर्मचारी से उसी टैक्स की दोबारा वसूली नहीं की जा सकती।

आयकर अधिनियम की धारा 205 भी कर्मचारियों को ऐसी स्थिति में सुरक्षा प्रदान करती है। इसके अलावा, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) भी पहले स्पष्ट कर चुका है कि TDS कटने के बाद उसे जमा न कराने की गलती के लिए कर्मचारी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। विशेषज्ञों की सलाह है कि ITR दाखिल करने से पहले फॉर्म-16, फॉर्म 26AS, सैलरी स्लिप और बैंक स्टेटमेंट का मिलान अवश्य करें। यदि TDS फॉर्म 26AS में दिखाई नहीं दे रहा है, लेकिन आपके पास TDS कटने के प्रमाण मौजूद हैं, तो सभी दस्तावेज सुरक्षित रखें। भविष्य में किसी भी जांच या नोटिस की स्थिति में यही रिकॉर्ड आपके अधिकारों की रक्षा करने में सबसे अहम साबित होंगे।