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सुप्रीम कोर्ट सख्त: तलाक के बाद 170 करोड़ के सोने की मांग पर फटकार, झूठे घरेलू हिंसा मामलों पर जताई चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई के दौरान झूठे घरेलू हिंसा के मामलों पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने उस महिला को भी फटकार लगाई, जिसने तलाक के बाद अपने पति से 170 करोड़ रुपये मूल्य के सोने की मांग की थी। कोर्ट ने साफ कहा कि जिन मामलों में शुरुआती तौर पर कोई ठोस सबूत या स्पष्ट आरोप नहीं दिखते, उन्हें आगे बढ़ाने की बजाय प्रारंभिक स्तर पर ही रोका जाना चाहिए।

यह मामला उस समय सामने आया जब पति ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। दोनों पक्षों के बीच पहले ही समझौता हो चुका था, लेकिन बाद में पत्नी की मांग पर हाईकोर्ट ने मामले की आगे सुनवाई की अनुमति दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस निर्णय को पलटते हुए महिला के दावों को अस्वीकार कर दिया।

महिला ने दावा किया था कि समझौते के तहत उसे 120 करोड़ रुपये के सोने के आभूषण और 50 करोड़ रुपये के सोने के बिस्किट मिलने थे। हालांकि, कोर्ट को न तो किसी लिखित समझौते में इसका उल्लेख मिला और न ही किसी अन्य दस्तावेज में इसका प्रमाण। अदालत ने यह भी कहा कि टैक्स बचाने के लिए इसे लिखित में न रखने का तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता।

मामले में यह भी सामने आया कि दंपति की शादी 2000 में हुई थी और 2022-23 से वे अलग रह रहे थे। 2024 में 1.5 करोड़ रुपये में पूरा सेटलमेंट हुआ था, जिसे दोनों ने स्वीकार भी किया था। बाद में महिला ने घरेलू हिंसा का केस दर्ज किया, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने ठोस आधारहीन बताया। अंत में, कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत विवाह को समाप्त कर दिया और सभी लंबित मामलों को खत्म मानते हुए समझौते के अनुसार बचे हुए भुगतान और धन वापसी के निर्देश दिए।