भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को घरेलू बाजार लगातार सातवें कारोबारी सत्र में नुकसान के साथ खुला, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई। वैश्विक अनिश्चितताओं, मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली का असर बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है।
कारोबार की शुरुआत से ही बाजार पर दबाव देखने को मिला। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 410 अंकों की गिरावट के साथ 73,935.83 पर खुला, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 74,346.17 पर बंद हुआ था। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी-50 भी 123 अंकों से अधिक टूटकर 23,282.45 के स्तर पर खुला। इससे पहले बुधवार को भी दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए थे।
हालांकि शुरुआती गिरावट के बाद बाजार ने कुछ हद तक रिकवरी की कोशिश की, लेकिन दोनों इंडेक्स पूरे समय नकारात्मक दायरे में ही कारोबार करते रहे। सुबह करीब 9:30 बजे सेंसेक्स लगभग 178 अंक टूटकर 74,168 के आसपास कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 52 अंक की गिरावट के साथ 23,353 के स्तर पर बना हुआ था।
सेक्टोरल स्तर पर आईटी और फार्मा शेयरों में सबसे अधिक दबाव देखने को मिला। देश की प्रमुख आईटी कंपनी इंफोसिस और दवा निर्माता सन फार्मा के शेयरों में करीब 2 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर, कुछ चुनिंदा शेयरों ने मजबूती दिखाई। निफ्टी के टॉप गेनर्स में ONGC, अदाणी एंटरप्राइजेज, अदाणी पोर्ट्स, इटरनल और ग्रासिम शामिल रहे। वहीं ट्रेंट, आइशर मोटर्स, सिप्ला, एसबीआई लाइफ और इंडिगो के शेयर प्रमुख लूजर्स में रहे। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक हालात सामान्य होने तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।









