यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा और अहम निर्देश जारी किया है। कोर्ट ने कहा है कि टैक्सी, बस, कैब और अन्य सार्वजनिक सेवा वाहनों को तब तक फिटनेस सर्टिफिकेट जारी न किया जाए, जब तक उनमें पैनिक बटन और व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) नहीं लगाए जाते। अदालत का मानना है कि यह कदम महिलाओं, बच्चों और बुजुर्ग यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी है।
पैनिक बटन एक इमरजेंसी सुरक्षा फीचर है, जिसका उपयोग किसी भी खतरे या आपात स्थिति में किया जाता है। अगर यात्रा के दौरान यात्री खुद को असुरक्षित महसूस करे, दुर्घटना हो जाए या मेडिकल इमरजेंसी सामने आए, तो इस बटन को दबाकर तुरंत मदद मांगी जा सकती है। बटन दबते ही वाहन की लाइव लोकेशन कंट्रोल रूम, पुलिस या इमरजेंसी सेवाओं तक पहुंच जाती है।
आमतौर पर यह बटन सीट के पास, दरवाजे के आसपास या वाहन के पिलर पर लगाया जाता है, ताकि जरूरत पड़ने पर यात्री आसानी से इसका इस्तेमाल कर सकें। इसके साथ लगाया जाने वाला व्हीकल ट्रैकिंग डिवाइस वाहन की गतिविधियों और लोकेशन पर लगातार नजर रखता है। इससे किसी भी आपात स्थिति में पुलिस और राहत एजेंसियों को तुरंत वाहन तक पहुंचने में मदद मिलती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस व्यवस्था को सख्ती से लागू किया गया, तो सार्वजनिक परिवहन पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित हो सकता है। इससे छेड़छाड़, अपराध और सड़क हादसों जैसी घटनाओं में तेजी से सहायता पहुंचाने में मदद मिलेगी और यात्रियों का भरोसा भी बढ़ेगा।









