दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सीजेपी के प्रदर्शन को लेकर लगाए गए प्रतिबंधों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। रविवार को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया कि राजधानी में जगह-जगह लगाए गए बैरिकेड्स तत्काल हटाए जाएं। अदालत ने स्पष्ट किया कि बैरिकेडिंग केवल उन्हीं स्थानों पर की जाए, जहां कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इसकी बेहद जरूरी हो। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली मेट्रो के सामान्य संचालन और इंटरनेट सेवाओं को भी महत्वपूर्ण बताया। अदालत ने कहा कि मेट्रो सेवाएं निर्धारित समय-सारणी के अनुसार चलनी चाहिए और शहर में इंटरनेट बंद नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही, लोगों की आवाजाही सामान्य बनाए रखने पर जोर दिया गया। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती है, तो आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि दिल्ली मेट्रो के कुल 303 स्टेशनों में से केवल 45 स्टेशन बंद किए गए थे। उन्होंने कहा कि अब सभी स्टेशन खोल दिए गए हैं और मेट्रो सेवाएं सुचारू रूप से संचालित हो रही हैं। इस पर अदालत ने कहा कि पहले भी मेट्रो संचालन बाधित नहीं करने की बात कही गई थी। स्टेशनों की संख्या कम किए जाने के बावजूद उन्हें बंद रखा गया था। अदालत ने इस मामले में दिल्ली मेट्रो से जवाब मांगा है और संबंधित नेटवर्क का नक्शा प्रस्तुत करने को भी कहा है। यह मामला दिल्ली मेट्रो स्टेशनों और ट्रेनों के संचालन पर लगाए गए प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली याचिका से जुड़ा है। इसमें गृह सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार और दिल्ली मेट्रो के चेयरपर्सन डी. थारा के खिलाफ भी याचिका दायर की गई थी। इसके अलावा, दूसरी याचिका में विपक्षी नेताओं की हिरासत को चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों से जवाब और स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। अब इस मामले में आगे की सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट होगा कि दिल्ली में आवाजाही और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।


