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रुपया 90 के पार कमजोर, महंगाई और आयात पर बढ़ा दबाव; निर्यातकों को मिलेगा फायदा

पिछले कुछ दिनों से भारतीय रुपया लगातार कमजोर हो रहा है और डॉलर के मुकाबले 90 रुपये का मनोवैज्ञानिक स्तर भी टूट चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि रुपये की यह गिरावट जहां कुछ निर्यात क्षेत्रों के लिए फायदेमंद होगी, वहीं आम जनता और आयातक उद्योगों पर इसका दबाव बढ़ेगा। पेट्रोल, डीजल समेत कई आयातित वस्तुओं की कीमतें बढ़ने की आशंका है।

एसबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के प्रमुख निर्यातों पर अमेरिका द्वारा लगाए गए 50% तक के टैरिफ रुपये की कमजोरी का मुख्य कारण हैं। इससे व्यापार घाटा अक्टूबर में रिकॉर्ड 41.68 अरब डॉलर तक पहुंच गया। सोने के आयात में उछाल ने भी घाटे को और बढ़ाया है। सरकार प्रभावित क्षेत्रों की सहायता के लिए वैश्विक व्यापार समझौतों पर जोर दे रही है, जबकि आरबीआई रुपये के स्तर में सीमित दखल की नीति पर काम कर रहा है।

कमजोर रुपये से आईटी, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग, फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे निर्यात क्षेत्रों को लाभ मिलेगा, क्योंकि भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में सस्ते हो जाते हैं। दूसरी ओर, कच्चा तेल, गैस, मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे आयातित सामान महंगे होंगे, जिससे महंगाई बढ़ेगी। आम लोगों पर इसका असर ईंधन, विदेशी शिक्षा, यात्रा और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के महंगे होने के रूप में दिख सकता है।