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कच्चे माल की महंगाई से ऑटो सेक्टर पर दबाव, बढ़ सकती हैं कारों की कीमतें

देश की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री इस समय बढ़ती लागत के संकट से जूझ रही है। Society of Indian Automobile Manufacturers के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2026 से स्टील, मेटल और प्लास्टिक जैसे प्रमुख कच्चे माल की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिससे वाहन निर्माताओं के मुनाफे पर दबाव बढ़ गया है और आने वाले समय में गाड़ियों की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव का सीधा असर कच्चे माल की कीमतों पर पड़ा है। स्टील के दाम करीब 10 प्रतिशत बढ़कर 60,000 रुपये प्रति टन तक पहुंच गए हैं, जबकि स्टेनलेस स्टील में 16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अलावा कोकिंग कोल, एल्युमीनियम और कॉपर जैसी धातुओं की कीमतों में भी 25 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है, जिससे वाहन निर्माण लागत में भारी इजाफा हुआ है।

प्लास्टिक और अन्य कच्चे पदार्थों की कीमतों में भी तेज उछाल देखने को मिला है। पॉलीप्रोपाइलीन जैसे थर्मोप्लास्टिक 34 प्रतिशत तक महंगे हो चुके हैं, जो गाड़ियों के इंटीरियर और अन्य पुर्जों में इस्तेमाल होते हैं। वहीं, प्रदूषण नियंत्रण प्रणाली में उपयोग होने वाली कीमती धातुएं जैसे प्लैटिनम, रोडियम और पैलेडियम भी 70 से 120 प्रतिशत तक महंगी हो गई हैं, जिससे वाहनों के एमिशन कंट्रोल सिस्टम की लागत और बढ़ गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल इस लागत बढ़ोतरी का असर मांग पर तुरंत नहीं दिखेगा, लेकिन यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो उपभोक्ता वाहन खरीदने का फैसला टाल सकते हैं। कमजोर रुपये ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है, जिससे कंपनियों को अपने मार्जिन बचाने के लिए कीमतें बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ सकता है। उद्योग से जुड़े जानकारों के अनुसार, किसी भी वाहन की कुल लागत में स्टील का हिस्सा 50 से 60 प्रतिशत तक होता है, ऐसे में इसकी कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर पूरी ऑटो इंडस्ट्री पर पड़ रहा है।