पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस की नियुक्ति को लेकर पंजाब सरकार और केंद्र के बीच विवाद गहरा गया है। पंजाब सरकार ने जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार की राय लिए बिना यह फैसला किया गया। इसी मुद्दे पर मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक हुई, जिसमें केंद्र के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया गया। विरोध के बावजूद सोमवार सुबह पंजाब राजभवन में जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने हाईकोर्ट के 37वें चीफ जस्टिस के रूप में शपथ ले ली। केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन ने पंजाब सरकार के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नियुक्ति में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया है।
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल चीमा का आरोप है कि राज्य सरकार को अपनी राय रखने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया। पंजाब सरकार ने Memorandum of Procedure (MOP) के पैरा 6 का हवाला देते हुए कहा कि संबंधित राज्य सरकार का दृष्टिकोण और सहमति महत्वपूर्ण है। सरकार ने नियुक्ति पर रोक लगाने और राज्य की राय का सम्मान करने की मांग की। वहीं, सत्य पाल जैन के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 6 अगस्त को नियुक्ति की सिफारिश की थी और 10 अगस्त को पंजाब व हरियाणा सरकार से राय मांगी गई थी। हरियाणा ने अपनी राय भेज दी, जबकि पंजाब की ओर से कोई जवाब नहीं आया। उन्होंने कहा कि राज्य की राय ली जाती है, लेकिन वह केंद्र के लिए बाध्यकारी नहीं है। मामले को लेकर बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल ने भी भगवंत मान सरकार पर निशाना साधा है। बीजेपी ने मुख्यमंत्री से माफी की मांग की, जबकि अकाली दल ने सवाल उठाया कि न्यायपालिका में नियुक्तियां क्या अब मुख्यमंत्रियों की सहमति से होंगी। इस विवाद ने पंजाब-केंद्र संबंधों और संघीय ढांचे को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।


