पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे हैं. लगातार तीसरे दिन हजारों लोग सड़कों पर उतरकर सरकार और सेना के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. लोगों का गुस्सा इतना तेज़ है कि उन्होंने पाकिस्तान की सेना और सरकार की तुलना “चुड़ैल” से कर डाली, जो जनता की जान लेने पर तुली है. यह आंदोलन सबसे पहले दो साल पहले शुरू हुआ था, जब लोगों ने आटा और बिजली पर सब्सिडी और नियमित आपूर्ति की मांग की थी. सरकार ने समझौता तो किया, लेकिन उसे लागू नहीं किया. धीरे-धीरे आंदोलन में और भी मुद्दे जुड़ते गए – अब यह सिर्फ महंगाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि न्याय, शिक्षा, स्वास्थ्य और राजनीतिक अधिकारों की मांग तक पहुंच गया है.
प्रदर्शनकारियों पर हाल ही में हुई गोलीबारी ने हालात को और तनावपूर्ण बना दिया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, गोलीबारी में 12 नागरिकों और 3 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई, जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हैं. आवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) ने सरकार के सामने 38 सूत्रीय मांगपत्र रखा है, जिसमें शरणार्थियों के कोटे को खत्म करना, शिक्षा-स्वास्थ्य की मुफ्त सुविधा, करों में राहत, सड़कों का निर्माण, न्यायपालिका में सुधार जैसी मांगें शामिल हैं. नेता शौकत नवाज मीर ने साफ कहा – यह संघर्ष किसी एक व्यक्ति से नहीं, पूरे सिस्टम से है। अब यह आंदोलन रुकने वाला नहीं दिख रहा.


