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प्रोजेक्ट-76 को मिली रफ्तार, भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाएंगी 12 स्वदेशी पनडुब्बियां

भारतीय नौसेना की समुद्री शक्ति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाला महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट-76 अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस परियोजना के तहत नौसेना को 12 नई स्वदेशी डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां मिलने की संभावना है, जो देश की अंडरवॉटर युद्ध क्षमता को पहले से कहीं अधिक मजबूत बनाएंगी। यह भारत का पहला ऐसा बड़ा कार्यक्रम होगा, जिसमें विदेशी डिजाइन पर निर्भरता कम करते हुए पूरी तरह भारतीय जरूरतों के अनुरूप अगली पीढ़ी की पनडुब्बियों का विकास किया जाएगा।

करीब 70,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले इस प्रोजेक्ट में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) सिस्टम, लिथियम-आयन बैटरियां, उन्नत स्टील्थ तकनीक और आधुनिक कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को शामिल किया जाएगा। इन पनडुब्बियों में लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों के लिए वर्टिकल लॉन्च सिस्टम (VLS) भी लगाया जा सकता है, जिससे उनकी मारक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

परियोजना में सरकारी कंपनी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) और निजी क्षेत्र की लार्सन एंड टुब्रो (L&T) के बीच तकनीकी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलेगी। MDL अपने कलवरी श्रेणी के अनुभव के आधार पर नया डिजाइन विकसित कर रही है, जबकि L&T अपने पनडुब्बी निर्माण अनुभव के दम पर उन्नत प्रस्ताव तैयार कर रही है।

संभावित योजना के अनुसार 2028 तक डिजाइन चरण पूरा होने के बाद निर्माण प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। पहली पनडुब्बी के अगले छह से सात वर्षों में नौसेना में शामिल होने की उम्मीद है। प्रोजेक्ट-76 के सफल क्रियान्वयन से भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक बढ़त मिलेगी, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता मजबूत होगी और घरेलू रक्षा उद्योग के साथ MSME सेक्टर को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।