गुजरात समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मंजूरी मिल गई है। राष्ट्रपति भवन के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक विधेयक को 17 सितंबर 2026 को assent दिया गया। इसके साथ गुजरात में UCC लागू करने की संवैधानिक प्रक्रिया का अहम चरण पूरा हो गया है। हालांकि, कानून के प्रभावी होने के लिए राज्य सरकार को अधिसूचना जारी करनी होगी।
गुजरात विधानसभा ने यह विधेयक 24 मार्च 2026 को पारित किया था। कानून का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों से जुड़े मामलों के लिए एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है। विधेयक के प्रावधान अनुसूचित जनजाति (ST) समुदायों पर लागू नहीं होंगे।
UCC के तहत विवाह और तलाक का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माने का प्रावधान है। लिव-इन संबंधों के पंजीकरण और उनके समाप्त होने की सूचना देने की व्यवस्था भी कानून में शामिल है। ऐसे संबंधों से जन्मे बच्चों को कानूनी मान्यता और महिला को परिस्थितियों के अनुसार भरण-पोषण का अधिकार देने का प्रावधान किया गया है।
कानून में बहुविवाह पर रोक और जबरन विवाह तथा अदालत के बाहर तलाक जैसी स्थितियों के लिए दंडात्मक प्रावधान भी रखे गए हैं। अब राज्य सरकार द्वारा नियम और अधिसूचना जारी किए जाने के बाद कानून के लागू होने की तारीख तय होगी।


